आँतें
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS)
एक आम बीमारी जिसमें आँत ज़्यादा संवेदनशील हो जाती है। इससे असली तकलीफ़ होती है, लेकिन आँत को नुकसान नहीं होता और कैंसर नहीं होता।
आम लक्षण
- पेट दर्द जो शौच के बाद कम हो जाए
- पेट फूलना
- कब्ज़, दस्त, या बारी-बारी दोनों
- तनाव में बढ़ना
वजहें और ख़तरे
- पेट और दिमाग़ का ज़्यादा संवेदनशील जुड़ाव
- पहले हुआ पेट का इन्फ़ेक्शन (पोस्ट-इन्फ़ेक्शियस IBS)
- तनाव, घबराहट और कम नींद
- कुछ खाने की चीज़ें जो आँत में सड़कर गैस बनाती हैं
- आँत के बैक्टीरिया में बदलाव
जाँच कैसे होती है
IBS की पहचान लक्षणों से होती है, ज़रूरत हो तो साधारण ब्लड और मल टेस्ट और सीलिएक टेस्ट के साथ। ख़तरे के संकेत हों या 45 के बाद नए लक्षण हों तो कोलोनोस्कोपी की सलाह दी जाती है।
इलाज
खान-पान में बदलाव, फ़ाइबर ठीक करना, तनाव कम करना, और ज़रूरत के हिसाब से दवाइयाँ। ज़रूरत हो तो दूसरी बीमारियों को हटाने के लिए जाँच होती है।
इलाज में मदद करने वाले प्रोसीजर
डाइट गाइड: IBS और पेट फूलना
ज़्यादा खाएँ
- खाने का तय समय
- घुलने वाला फ़ाइबर: ओट्स, इसबगोल, पकी सब्ज़ियाँ
- दही और छाछ, अगर सूट करें
- दिन भर में पर्याप्त पानी
- धीरे-धीरे, चबाकर खाना
कम करें
- राजमा, चना, प्याज़ और लहसुन ज़्यादा मात्रा में, अगर इनसे तकलीफ़ बढ़े
- सोडा और कोल्ड ड्रिंक
- सॉर्बिटॉल वाली शुगर-फ़्री च्युइंग गम और मिठाइयाँ
- ज़्यादा चाय और कॉफ़ी
- बहुत तीखा या तैलीय खाना
जानने लायक
- सही मार्गदर्शन में लो-FODMAP डाइट कई लोगों की मदद करती है
- तनाव और कम नींद से लक्षण बढ़ते हैं
- 45 के बाद नए लक्षण, खून आना या वज़न घटे तो पहले जाँच ज़रूरी है
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट को कब दिखाएँ
लक्षण रोज़ की ज़िंदगी पर असर डालें, या 45 की उम्र के बाद आँत के नए लक्षण।
आम सवाल
क्या IBS ख़तरनाक है?
नहीं। इससे असली तकलीफ़ होती है, लेकिन आँत को नुकसान नहीं होता और कैंसर नहीं होता।
क्या IBS पूरी तरह ठीक हो सकता है?
इसका एक बार में पूरा इलाज नहीं है, लेकिन खान-पान, दिनचर्या, तनाव की देखभाल और ज़रूरत हो तो दवाइयों से ज़्यादातर लोगों को काफ़ी आराम मिलता है।