आँतें
कब्ज़
सख़्त, कम या मुश्किल से होने वाला मल, ज़्यादातर कम फ़ाइबर, कम पानी, कम चलने-फिरने या दवाइयों से।
आम लक्षण
- हफ़्ते में 3 से कम बार शौच
- ज़ोर लगाना पड़ना
- पेट पूरा साफ़ न होने का एहसास
वजहें और ख़तरे
- कम फ़ाइबर और कम पानी
- कम शारीरिक गतिविधि
- आयरन, कैल्शियम और कुछ दर्द की गोलियों जैसी दवाइयाँ
- थायरॉइड, डायबिटीज़ और प्रेगनेंसी
- IBS, और पेल्विक फ़्लोर की माँसपेशियों की दिक्कत
जाँच कैसे होती है
ज़्यादातर लोगों को किसी टेस्ट की ज़रूरत नहीं होती। 45 के बाद नई कब्ज़, मल में खून, वज़न घटने या परिवार में आँत के कैंसर पर ब्लड टेस्ट या कोलोनोस्कोपी की सलाह दी जाती है।
इलाज
ज़्यादा फ़ाइबर, पानी और चलना-फिरना, शौच का तय समय, और ज़रूरत हो तो सुरक्षित जुलाब।
इलाज में मदद करने वाले प्रोसीजर
डाइट गाइड: कब्ज़
ज़्यादा खाएँ
- रोज़ 25 से 30 ग्राम फ़ाइबर, धीरे-धीरे बढ़ाएँ
- छिलके वाले फल: अमरूद, नाशपाती, सेब; और पपीता
- साबुत अनाज, दाल और सब्ज़ियाँ
- इतना पानी कि पेशाब हल्का पीला रहे
- रोज़ टहलना या व्यायाम
कम करें
- मैदा और पैकेट वाले स्नैक्स
- नाश्ता छोड़ना
- शौच की इच्छा को रोकना
- बिना सलाह लंबे समय तक तेज़ जुलाब
जानने लायक
- नाश्ते के बाद छोटे स्टूल पर पैर रखकर शौच के लिए बैठें
- इसबगोल पर्याप्त पानी के साथ ही काम करता है
- 45 के बाद नई कब्ज़ या मल में खून हो तो जाँच करवाएँ
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट को कब दिखाएँ
45 की उम्र के बाद नई कब्ज़, मल में खून, वज़न घटना, या आसान उपायों से आराम न मिलना।
आम सवाल
क्या रोज़ शौच जाना ज़रूरी है?
नहीं। दिन में तीन बार से लेकर हफ़्ते में तीन बार तक सामान्य हो सकता है, अगर आराम से होता हो।
क्या जुलाब नुकसानदेह हैं?
ज़रूरत पर हल्के जुलाब सुरक्षित हैं। लंबे समय तक रोज़ तेज़ जुलाब लेने पर डॉक्टर से बात करें।