त्योहार गाइड
बिना एसिडिटी के नवरात्रि व्रत: आसान गाइड
नवरात्रि में बहुत से लोग नौ दिन तक खाने का तरीका और समय बदल देते हैं: लंबे गैप, तले हुए व्रत के स्नैक्स, ज़्यादा चाय, और रात में भारी खाना। त्योहार के दौरान एसिडिटी, पेट फूलना, कब्ज़ और कमज़ोरी की सबसे आम वजह यही है। कुछ आसान बदलावों से आप व्रत भी रख सकते हैं और पेट भी आराम में रहता है।
छोटे में
हर 3 से 4 घंटे में कुछ थोड़ा खाएँ, तले की जगह भुना चुनें, भरपूर पानी पिएँ, और रात का खाना हल्का और जल्दी रखें। कुट्टू और सिंघाड़े का आटा भरोसेमंद दुकान से ताज़ा ख़रीदें। अगर डायबिटीज़ है, प्रेगनेंसी है, अल्सर है या रोज़ की दवाइयाँ लेते हैं, तो व्रत से पहले डॉक्टर से बात करें।
अपने व्रत का प्रकार जानें
फलाहार
फल और दूध वाला व्रत
- दिन भर फल, दही, दूध, मखाना और मेवे
- ज़्यादातर लोगों के पेट के लिए सबसे आसान
- ताक़त के लिए दिन में एक बार साबूदाना या समा के चावल
एकासना
दिन में एक बार खाना
- एक पूरा खाना, अक्सर शाम को
- लंबे गैप से एसिडिटी और कमज़ोरी हो सकती है
- अगर परंपरा में चलता हो, तो दिन में फल या छाछ लें
निर्जला
न खाना, न पानी
- पानी की कमी, चक्कर और शुगर गिरने का ख़तरा
- डायबिटीज़, प्रेगनेंसी, किडनी या दिल की बीमारी में, और बुज़ुर्गों के लिए सलाह नहीं दी जाती
- अगर रखें, तो एक दिन तक ही रखें और धीरे से खोलें
आम परेशानियाँ और क्या मदद करता है
एसिडिटी और सीने में जलन
नवरात्रि में सबसे आम शिकायत, जो लंबे गैप, ख़ाली पेट चाय और तले खाने से होती है।
क्या मदद करता है
- दिन की शुरुआत पानी और कुछ भीगे बादाम या एक फल से करें, फिर चाय लें
- हर 3 से 4 घंटे में कुछ थोड़ा खाएँ
- पकौड़ी और चिप्स की जगह भुना मखाना, फल और दही चुनें
- रात का खाना हल्का रखें, लगभग 8 बजे तक, और लेटने से 2 से 3 घंटे पहले
- अगर एसिडिटी की दवा लेते हैं, तो डॉक्टर के बताए अनुसार लेते रहें
अगर एसिडिटी ठीक न हो, या निगलने में दर्द, उल्टी या काला मल हो, तो डॉक्टर को दिखाएँ। पसीने या साँस फूलने के साथ सीने में दर्द एसिडिटी नहीं, इमरजेंसी है।
कब्ज़
कम पानी, कम फ़ाइबर, और ज़्यादा साबूदाना और आलू से आम है।
क्या मदद करता है
- दिन में 8 से 10 गिलास पानी, साथ में छाछ या नारियल पानी
- छिलके वाले फल, जैसे अमरूद, सेब और नाशपाती, और भीगी किशमिश या अंजीर
- हर खाने में लौकी, कद्दू, खीरा और व्रत की दूसरी सब्ज़ियाँ
- व्रत में भी रोज़ सैर
अगर कब्ज़ एक हफ़्ते से ज़्यादा रहे, या मल में खून या तेज़ दर्द हो, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
कमज़ोरी, चक्कर और सिरदर्द
आम तौर पर कम पानी, शुगर कम होने, या रोज़ की चाय-कॉफ़ी छूटने से होता है।
क्या मदद करता है
- दिन भर पानी, नींबू पानी या नारियल पानी पिएँ
- कमज़ोरी लगे तो एक फल, कुछ खजूर या मुट्ठी भर मेवे खाएँ
- अगर शुगर या ब्लड प्रेशर की दवा लेते हैं, तो खाना पूरी तरह न छोड़ें
- आराम करें, और ख़ाली पेट धूप में या लंबी पूजा में देर तक खड़े न रहें
बेहोशी, भ्रम, या काँपने और पसीने पर, या खाने-पीने के बाद भी कमज़ोरी ठीक न हो, तो व्रत तोड़ें और डॉक्टर को दिखाएँ।
गैस और पेट फूलना
साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़ा भारी होते हैं, और लंबे गैप के बाद ज़्यादा खाने से पेट फूलता है।
क्या मदद करता है
- थोड़ा खाएँ, धीरे-धीरे
- साबूदाने के साथ सब्ज़ी और दही लें
- कोल्ड ड्रिंक से बचें
- खाने के बाद थोड़ा टहलें
पेट फूलने के साथ तेज़ या लगातार दर्द, उल्टी या बुख़ार हो, तो जाँच करवाएँ।
नवरात्रि में खाने की सुरक्षा
त्योहार का सामान ज़्यादा मात्रा में आता है और कई दिन रखा जाता है। कुछ सावधानियों से ज़्यादातर बीमारियाँ रुक जाती हैं।
कुट्टू और सिंघाड़े का आटा
हर नवरात्रि में बासी या मिलावटी कुट्टू आटा खाने से लोग बीमार पड़ते हैं। भरोसेमंद दुकान से ताज़ा, सील बंद पैकेट ख़रीदें, तारीख़ देखें, और खुला आटा ज़्यादा दिन न रखें। कुट्टू खाने के कुछ देर बाद उल्टी, चक्कर या दस्त हों, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।
दूध, पनीर और मिठाइयाँ
खोया, पनीर और मिठाइयाँ भरोसेमंद दुकान से लें और फ़्रिज में रखें। जिस मिठाई की गंध या स्वाद बासी लगे, उसे न खाएँ। दूध उबालकर इस्तेमाल करें।
सड़क की व्रत थाली और जूस
ठेले के कटे फल और जूस से हेपेटाइटिस A और E और टाइफ़ाइड जैसे इन्फ़ेक्शन फैल सकते हैं। घर का बना खाना और ख़ुद धोए साबुत फल बेहतर हैं।
सेंधा नमक
सेंधा नमक भी नमक ही है। हाई ब्लड प्रेशर, दिल या किडनी की बीमारी में इसे भी सामान्य नमक जितना ही कम इस्तेमाल करें।
इनमें से कुछ हो तो व्रत तोड़ें और मदद लें
- बेहोशी, भ्रम या तेज़ चक्कर
- काँपना, पसीना और तेज़ धड़कन, जो शुगर कम होने का संकेत हो सकता है
- उल्टी जो रुक न रही हो, या बहुत कम पेशाब
- उल्टी में खून, या काला, तारकोल जैसा मल
- सीने में दर्द, या पेट के ऊपरी हिस्से में तेज़ दर्द
- कुट्टू आटा खाने के कुछ देर बाद उल्टी या चक्कर
112 पर कॉल करें या सबसे पास की इमरजेंसी में जाएँ। व्रत बाद में भी रखा जा सकता है; सेहत पहले है।
किन्हें व्रत से पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए
ज़्यादातर स्वस्थ लोगों के लिए व्रत सुरक्षित है। कुछ लोगों के लिए प्लानिंग ज़रूरी है, और कुछ को सख़्त व्रत नहीं रखना चाहिए।
डायबिटीज़
व्रत में शुगर ख़तरनाक रूप से गिर या बढ़ सकती है। शुगर ज़्यादा बार जाँचें, और व्रत से पहले डायबिटीज़ की दवाइयों के समय और मात्रा के बारे में डॉक्टर से पूछें। निर्जला व्रत न रखें।
प्रेगनेंसी और स्तनपान
लंबा या निर्जला व्रत न रखें। हर कुछ घंटे में खाएँ और भरपूर पानी पिएँ। प्रेगनेंसी और पेट की सेहत पर हमारी गाइड में और सलाह है।
अल्सर, तेज़ एसिडिटी या लिवर की बीमारी
लंबे गैप से अल्सर का दर्द लौट सकता है। फल और दही वाला व्रत चुनें और दवाइयाँ लेते रहें। सिरोसिस हो तो व्रत से पहले डॉक्टर से पूछें।
किडनी या दिल की बीमारी, और बुज़ुर्ग
पानी, नमक और दवा के समय का ध्यान ज़रूरी है। कुछ गोलियाँ खाने के साथ ही लेनी होती हैं, इसलिए खाने का तरीका बदलने से पहले डॉक्टर से पूछें।
बच्चे और किशोर
बढ़ते बच्चों को सख़्त व्रत नहीं रखना चाहिए। दिन के कुछ हिस्से का फल-दूध वाला व्रत शामिल होने का सुरक्षित तरीका है।
नवरात्रि में क्या खाएँ
व्रत का खाना भी संतुलित हो सकता है: हर खाने में पेट भरने वाली चीज़, थोड़ा प्रोटीन, सब्ज़ी और पानी।
ज़्यादा खाएँ
- भुना मखाना, मूँगफली और थोड़े से मेवे
- प्रोटीन के लिए दही, छाछ, पनीर और दूध
- व्रत की सब्ज़ियाँ: लौकी, कद्दू, खीरा, शकरकंद और टमाटर
- फल: अमरूद, सेब, पपीता, केला और अनार
- गेहूँ और चावल की जगह कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा और समा
- पानी, नींबू पानी और नारियल पानी
कम करें
- पकौड़ी, पूरी, साबूदाना वड़ा और चिप्स
- ख़ाली पेट चाय या कॉफ़ी
- मिठाइयाँ, मीठी लस्सी और फलों का जूस
- लंबे गैप के बाद बहुत ज़्यादा खाना
- देर रात भारी खाना
जानने लायक
- साबूदाना ज़्यादातर स्टार्च है; इसे मूँगफली, सब्ज़ी और दही के साथ खाएँ
- राजगिरा और कुट्टू में साबूदाने से ज़्यादा प्रोटीन और फ़ाइबर है
- डायबिटीज़ में साबूदाना, आलू और मिठाई कम रखें, और शुगर ज़्यादा बार जाँचें
- कुट्टू और सिंघाड़े का आटा ताज़ा, सील बंद पैकेट में ख़रीदें
व्रत का आसान दिन
- सुबह
- पहले पानी, फिर कुछ भीगे बादाम और चाय
- नाश्ता
- एक फल के साथ एक कटोरी दही, या एक गिलास दूध
- दोपहर का खाना
- मूँगफली और सब्ज़ी वाली साबूदाना खिचड़ी, या लौकी के साथ समा के चावल, और दही
- शाम
- भुना मखाना या मूँगफली, छाछ या नारियल पानी के साथ
- रात का खाना
- कुट्टू या राजगिरा की रोटी सब्ज़ी के साथ, लगभग 8 बजे तक
- सोने से पहले
- एक गिलास गुनगुना दूध, अगर सूट करे
आम सवाल
क्या एसिडिटी में व्रत रखना सुरक्षित है?
हाँ, ज़्यादातर लोगों के लिए, अगर लंबे गैप न हों। हर 3 से 4 घंटे में थोड़ा खाने वाला फल-दही का व्रत, एक बार खाने या निर्जला व्रत से पेट के लिए आम तौर पर आसान होता है।
क्या डायबिटीज़ वाले नवरात्रि का व्रत रख सकते हैं?
कई लोग रख सकते हैं, प्लानिंग के साथ। व्रत से पहले अपनी दवाइयों के बारे में डॉक्टर से बात करें, शुगर ज़्यादा बार जाँचें, निर्जला व्रत न रखें, और शुगर कम हो तो व्रत तोड़ दें।
क्या व्रत में दवाइयाँ बंद कर दें?
नहीं। रोज़ की दवाइयाँ अपने आप बंद न करें। डॉक्टर से पूछें कि क्या समय बदलना है, क्योंकि कुछ गोलियाँ खाने के साथ ही लेनी होती हैं।
क्या व्रत में साबूदाना अच्छा है?
इससे जल्दी ताक़त मिलती है, लेकिन प्रोटीन और फ़ाइबर कम होता है। इसे थोड़ी मात्रा में मूँगफली, सब्ज़ी और दही के साथ खाएँ, और बीच-बीच में कुट्टू, राजगिरा या समा लें।