सवाल-जवाब
लैक्टोज़ इनटॉलरेंस क्या है?
इसे ऐसे भी खोजा जाता है: doodh se gas banna · doodh hazam na hona
छोटा जवाब
लैक्टोज़ इनटॉलरेंस का मतलब है कि आँत दूध की प्राकृतिक शक्कर, लैक्टोज़, को पूरी तरह नहीं पचा पाती। इससे दूध लेने के कुछ घंटों में गैस, पेट फूलना, मरोड़ या दस्त होते हैं। भारत में बड़ों में यह बहुत आम है और ख़तरनाक नहीं है। ज़्यादातर लोग फिर भी दही, पनीर और थोड़ा दूध ले सकते हैं।
लक्षण
लैक्टोज़ इनटॉलरेंस दूध की एलर्जी नहीं है। दूध की एलर्जी बड़ों में कम होती है और उसमें दाने, सूजन या साँस की तकलीफ़ हो सकती है।
- दूध, ज़्यादा दूध वाली चाय, खीर या मिल्कशेक के बाद पेट फूलना, गैस और गुड़गुड़ाहट
- 30 मिनट से कुछ घंटों में मरोड़ या दस्त
कैसे पता करें
सबसे आसान तरीका है दो हफ़्ते दूध बंद करके देखें कि लक्षण ठीक होते हैं या नहीं, फिर दोबारा शुरू करें। हाइड्रोजन ब्रेथ टेस्ट से पुष्टि हो सकती है। दूध के बिना भी लक्षण रहें तो IBS या सीलिएक बीमारी जैसी दूसरी वजहों की जाँच होनी चाहिए।
आप क्या खा सकते हैं
- दही, लस्सी और छाछ, क्योंकि इनके बैक्टीरिया काफ़ी लैक्टोज़ तोड़ देते हैं
- पनीर और सख़्त चीज़, जिनमें बहुत कम लैक्टोज़ होता है
- खाने के साथ थोड़ा दूध, जो अक्सर पच जाता है
- लैक्टोज़-फ़्री दूध, जो कई दुकानों में मिलता है
पर्याप्त कैल्शियम
दूध कम करें तो कैल्शियम दही, पनीर, रागी, तिल, हरी पत्तेदार सब्ज़ियों और लैक्टोज़-फ़्री दूध से लें। वज़न घटे, मल में खून आए, या लक्षण 45 साल के बाद पहली बार शुरू हों तो डॉक्टर को दिखाएँ।
छिपी हुई दूध की शक्कर से सावधान
ज़्यादा खाएँ
- दही, छाछ और दही से बनी लस्सी
- पनीर और सख़्त चीज़
- लैक्टोज़-फ़्री दूध, या खाने के साथ थोड़ा दूध
कम करें
- ख़ाली पेट बड़ा गिलास दूध, मिल्कशेक और खीर
- खोया और दूध वाली मिठाइयाँ, आइसक्रीम और मिल्क पाउडर
- कुछ प्रोटीन पाउडर, चॉकलेट और मिल्क सॉलिड वाले बेकरी आइटम
जानने लायक
- ज़्यादातर लोग एक बार में लगभग एक कप (250 ml) तक दूध पचा लेते हैं, ख़ासकर खाने के साथ।
- थोड़े दूध वाली चाय आमतौर पर ठीक रहती है।
आम सवाल
क्या लैक्टोज़ इनटॉलरेंस बड़ी उम्र में शुरू हो सकता है?
हाँ। लैक्टोज़ पचाने वाला एंज़ाइम बचपन के बाद अपने आप कम होता है, इसलिए भारत में कई बड़ों में धीरे-धीरे लक्षण आते हैं।
क्या यह हमेशा रहता है?
आमतौर पर, पर सहनशक्ति हर व्यक्ति में अलग होती है। पेट के इंफ़ेक्शन के बाद यह कुछ हफ़्तों के लिए हो सकता है और फिर सुधर जाता है।
क्या इससे आँत को नुकसान होता है?
नहीं। इससे तकलीफ़ होती है, नुकसान नहीं। अगर वज़न घटे, मल में ख़ून हो या ख़ून की कमी हो, तो दूसरी वजह देखनी चाहिए।