त्योहार गाइड
बिना एसिडिटी की दिवाली: पेट और लिवर के लिए गाइड
दिवाली के हफ़्ते में मिठाई के डिब्बे, नमकीन की कटोरियाँ, ताश पार्टियाँ, देर रात का खाना और बहुतों के लिए सामान्य से ज़्यादा शराब आती है। हर साल इसी समय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एसिडिटी, पेट फूलना, बासी या मिलावटी मिठाई से दस्त, पथरी के दौरे और पैंक्रियाटाइटिस के मामले बढ़ते देखते हैं। कुछ आसान आदतों से आप त्योहार का हर दिन मना सकते हैं और फिर भी ठीक रह सकते हैं।
संक्षेप में
दिन की शुरुआत कभी ख़ाली पेट मिठाई से न करें, एक बार में एक-दो टुकड़े ही लें, तले की जगह भुने स्नैक्स चुनें, और डिनर जल्दी ख़त्म करें। खोया, पनीर और मिठाई भरोसेमंद, लाइसेंस वाली दुकानों से ख़रीदें और फ़्रिज में रखें। एक साथ बहुत ज़्यादा शराब से बचें, और अगर फ़ैटी लिवर, पथरी, पहले पैंक्रियाटाइटिस या डायबिटीज़ है तो पहले से योजना बनाएँ।
त्योहार के हफ़्ते में
धनतेरस और उससे पहले
ख़रीदारी और सफ़ाई
- मिठाइयाँ बड़ी मात्रा में ख़रीदी जाती हैं और कई दिन रखी जाती हैं, इसलिए देखें कहाँ से आई हैं
- सफ़ाई और ख़रीदारी के लंबे दिनों में खाना छूटता है और फिर शाम को भारी नाश्ता होता है
- नियमित खाना खाएँ, और बाहर जाते समय फल या भुना चना साथ रखें
दिवाली की रात
पूजा, दावत और पार्टियाँ
- साल का सबसे बड़ा खाना, अक्सर देर रात
- मिठाई, तले स्नैक्स और शराब एक साथ एसिडिटी और पैंक्रियाटाइटिस की सबसे आम वजह हैं
- लगभग 9 बजे तक डिनर करें, और बाद में 15 से 20 मिनट टहलें
गोवर्धन से भाई दूज
बचा खाना और और दावतें
- बची मिठाई और नमकीन कई दिन तक खाई जाती है
- बासी खोया और पनीर से फ़ूड पॉयज़निंग होती है
- अतिरिक्त डिब्बे ख़त्म करने के बजाय बाँट दें
आम समस्याएँ और क्या मदद करता है
एसिडिटी और सीने में जलन
ख़ाली पेट मिठाई, तले स्नैक्स, देर रात भारी डिनर और शराब, सभी पेट के ऊपर के वाल्व को ढीला करते हैं।
क्या मदद करता है
- मिठाई से पहले ठीक से खाना खाएँ, खाने की जगह मिठाई नहीं
- एक बार में मिठाई के एक-दो टुकड़े, खाने के बाद
- लगभग 9 बजे तक डिनर, और लेटने से पहले 2 से 3 घंटे रुकें
- पूरे हफ़्ते चाय, कॉफ़ी और सोडा कम करें
- अगर नियमित रूप से एसिडिटी की दवा लेते हैं, तो पर्चे के अनुसार लेते रहें
अगर एसिडिटी कुछ दिनों में ठीक न हो, या निगलने में दिक़्क़त, उल्टी या काले मल के साथ हो, तो डॉक्टर को दिखाएँ। पसीने या साँस फूलने के साथ सीने में दर्द इमरजेंसी है, एसिडिटी नहीं।
पेट फूलना और क़ब्ज़
त्योहार में ढेर सारा मैदा, तला खाना और चीनी, कम फ़ाइबर और पानी, और कम चलना-फिरना।
क्या मदद करता है
- हर दावत में सलाद, दाल और एक सब्ज़ी जोड़ें
- दिन भर पानी, छाछ या नींबू पानी पिएँ
- खाने के बीच में फल और भुना मखाना या चना
- हर दिन टहलें, दिवाली के दिन भी
क़ब्ज़ एक हफ़्ते से ज़्यादा रहे, या मल में ख़ून या तेज़ दर्द के साथ हो, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
दस्त और फ़ूड पॉयज़निंग
आमतौर पर बासी या मिलावटी खोया, पनीर और दूध की मिठाइयों से, या घंटों बाहर रखे खाने से।
क्या मदद करता है
- हर पतले दस्त के बाद ORS, और खिचड़ी और दही-चावल जैसा हल्का खाना
- खट्टी महक वाली, चिपचिपी या फफूंद लगी मिठाई फेंक दें
- दूध की मिठाइयाँ ख़रीदने के 2 घंटे के भीतर फ़्रिज में रखें
मल में ख़ून, तेज़ बुखार, इतनी उल्टी कि पानी न टिके, या बहुत कम पेशाब हो तो उसी दिन डॉक्टर को दिखाएँ।
शराब के बाद
पार्टियों में एक साथ बहुत ज़्यादा शराब लिवर पर ज़ोर डालती है और एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस या गैस्ट्राइटिस कर सकती है, ख़ासकर चिकने खाने के साथ।
क्या मदद करता है
- एक बैठक में चार या ज़्यादा ड्रिंक से बचें
- पीने से पहले खाएँ, और हर ड्रिंक के बाद पानी पिएँ
- ड्रिंक के साथ मीठे मिक्सर और तले स्नैक्स छोड़ें
- लिवर की कोई बीमारी या पहले पैंक्रियाटाइटिस हो तो बिल्कुल न पिएँ
पार्टी के बाद पीठ तक जाता पेट के ऊपर तेज़ दर्द, उल्टी के साथ, 'बस एसिडिटी' नहीं है: इमरजेंसी में जाएँ।
इस दिवाली खाने की सुरक्षा
दिवाली में खोया, पनीर और मिठाई की माँग सबसे ज़्यादा होती है, और मिलावट भी। कुछ जाँचें परिवार को बचाती हैं।
खोया, पनीर और दूध की मिठाइयाँ
भरोसेमंद दुकानों से ख़रीदें, देखें कि डिब्बे पर FSSAI लाइसेंस नंबर और 'बेस्ट बिफ़ोर' तारीख़ हो, और असामान्य रूप से सस्ते खोये से सावधान रहें। घर पर थोड़े खोये पर आयोडीन की कुछ बूँदें नीली हो जाएँ तो स्टार्च की मिलावट का संकेत है। दूध की मिठाइयाँ फ़्रिज में रखें और 2 से 3 दिन में खा लें।
चाँदी का वर्क और रंग
असली चाँदी का वर्क थोड़ी मात्रा में ठीक है। मिठाइयों पर बहुत चटक, अप्राकृतिक रंगों से बचना बेहतर है।
मेवे और नमकीन
फफूंद लगे, बदरंग या कड़वे मेवे फेंक दें, क्योंकि फफूंद से एफ़्लाटॉक्सिन बन सकता है, जो लिवर के लिए ज़हर है। पैकेट वाली नमकीन में बहुत नमक होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर, दिल या लिवर की बीमारी में मायने रखता है।
बचा खाना
2 घंटे से ज़्यादा कमरे के तापमान पर रखे पके खाने में कीटाणु पनप सकते हैं। जल्दी फ़्रिज में रखें और भाप निकलने तक गरम करें।
तुरंत मदद लें अगर
- पीठ तक जाता पेट के ऊपर तेज़ दर्द, उल्टी के साथ
- ख़ून की उल्टी, या काला, तारकोल जैसा मल
- न रुकने वाली उल्टी, या बहुत कम पेशाब
- पसीने या साँस फूलने के साथ सीने में दर्द
- आँखें पीली, या लिवर की बीमारी वाले व्यक्ति में भ्रम और ज़्यादा नींद
- भारी खाने के बाद दाईं पसलियों के नीचे तेज़ दर्द, बुखार के साथ
112 पर कॉल करें या नज़दीकी इमरजेंसी में जाएँ। इन्हें घर पर एंटासिड से संभालने की कोशिश न करें।
किसे पहले से योजना बनानी चाहिए
ज़्यादातर लोग थोड़े ध्यान से त्योहार मना सकते हैं। कुछ बीमारियों में दिवाली के हफ़्ते में ज़्यादा ध्यान चाहिए।
डायबिटीज़
कई दिनों की मिठाई और देर से खाने से शुगर तेज़ी से बढ़ सकती है। मिठाई खाने के बाद छोटा टुकड़ा ही लें, मेवे वाली या कम चीनी वाली चुनें, शुगर ज़्यादा बार जाँचें, और दवाएँ न छोड़ें। 'शुगर-फ़्री' मिठाई में भी फ़ैट और कैलोरी होती है, और कुछ से गैस या दस्त होते हैं।
फ़ैटी लिवर और लिवर की दूसरी बीमारियाँ
शराब बिल्कुल न लें। सिरोसिस में नमक कम रखें, यानी नमकीन और पैकेट वाले स्नैक्स बहुत कम, और थोड़ा-थोड़ा नियमित खाना।
पित्त की पथरी
भारी, चिकना खाना पथरी के दर्द की सबसे आम वजह है। दावत का खाना संतुलित रखें और देर रात भारी तला खाना न खाएँ।
पहले पैंक्रियाटाइटिस
शराब और बहुत चिकना खाना दोबारा दौरा ला सकते हैं। शराब बिल्कुल न लें, और हल्का त्योहारी खाना चुनें।
एसिडिटी, IBS और बुज़ुर्ग
छोटे हिस्से, जल्दी डिनर और नियमित समय पर खाना मदद करते हैं। बुज़ुर्ग भरपूर तरल लेते रहें, क्योंकि व्यस्त त्योहारी दिनों में पानी की कमी और क़ब्ज़ आम हैं।
इस दिवाली क्या खाएँ
त्योहारी खाना भी संतुलित हो सकता है: अपनी सबसे पसंदीदा मिठाई थोड़ी मात्रा में, सामान्य खाने के साथ लें।
ज़्यादा खाएँ
- अपनी पसंदीदा मिठाई, एक-दो छोटे टुकड़े, खाने के बाद
- तली नमकीन की जगह भुना मखाना, चना और मुट्ठी भर मेवे
- मेवे वाली, फल वाली या घर की बनी कम चीनी वाली मिठाई
- हर दावत में सलाद, दाल और एक सब्ज़ी
- पानी, छाछ, नींबू पानी और ग्रीन टी
कम करें
- ख़ाली पेट मिठाई
- दिन भर बार-बार तले स्नैक्स
- शराब, मीठे मिक्सर और कोला
- देर रात भारी डिनर
- पैकेट वाली नमकीन और चिप्स
जानने लायक
- पार्टियों में छोटी प्लेट लें और खाने का एक ही राउंड लें, तीन नहीं
- मुख्य खाने के बाद 15 से 20 मिनट टहलना पाचन और शुगर में मदद करता है
- और मिठाई की जगह मेवे, फलों की टोकरी या पौधे तोहफ़े में दें
- बची मिठाई हफ़्ते भर में ख़त्म करने के बजाय बाँट दें
दिवाली का आसान दिन
- सुबह
- पहले पानी, फिर चाय के साथ एक फल या कुछ भीगे बादाम
- नाश्ता
- पोहा, उपमा, बेसन चीला या दही के साथ भरवाँ रोटी
- दोपहर
- सामान्य घर का खाना: रोटी या चावल, दाल, एक सब्ज़ी और सलाद
- शाम की पूजा
- फल या चने जैसे हल्के नाश्ते के बाद प्रसाद या मिठाई के एक-दो टुकड़े
- रात का खाना
- त्योहारी खाना लगभग 9 बजे तक: पहले आधी प्लेट सब्ज़ियों और सलाद से भरें
- रात
- थोड़ा टहलें, और डिनर के बाद 2 से 3 घंटे न लेटें
दिवाली के बाद: पेट को फिर पटरी पर लाएँ
एक हफ़्ते के भारी खाने के बाद कुछ दिन सादे घर के खाने पर लौटें: दाल, रोटी या चावल, सब्ज़ियाँ, दही और फल, भरपूर पानी और रोज़ टहलने के साथ।
जूस, जुलाब या उपवास से 'डिटॉक्स' न करें। सामान्य, संतुलित खाने से लिवर और पेट अपने आप ठीक हो जाते हैं।
अगर त्योहार के बाद दो हफ़्ते से ज़्यादा एसिडिटी, पेट फूलना, दर्द या मल की आदत में बदलाव रहे, या कोई ख़तरे का संकेत हो, तो जाँच कराएँ।
आम सवाल
क्या डायबिटीज़ वाले दिवाली पर मिठाई खा सकते हैं?
जिनकी डायबिटीज़ अच्छी तरह नियंत्रित है, उनके लिए खाने के बाद एक छोटा टुकड़ा आमतौर पर ठीक है। शुगर ज़्यादा बार जाँचें, दवाएँ लेते रहें, और ख़ाली पेट मिठाई से बचें।
क्या फ़ैटी लिवर में शराब पी सकते हैं?
न पीना ही बेहतर है। शराब और फ़ैटी लिवर मिलकर लिवर का नुकसान तेज़ करते हैं। पार्टियों में नींबू पानी या नारियल पानी जैसे बिना शराब के पेय चुनें।
भारी खाने के बाद एसिडिटी के लिए क्या लें?
कभी-कभार एंटासिड ठीक है। बार-बार ज़रूरत पड़े तो ज़्यादा गोलियाँ लेने के बजाय खाने की आदतें बदलें या डॉक्टर को दिखाएँ।
क्या शुगर-फ़्री मिठाइयाँ ज़्यादा सेहतमंद हैं?
इनमें चीनी कम होती है पर अक्सर उतना ही फ़ैट और उतनी ही कैलोरी। सॉर्बिटॉल और माल्टिटॉल जैसे कुछ स्वीटनर ज़्यादा मात्रा में गैस और दस्त करते हैं।