Dr. Kshitij Lochabपेट · लिवर · एंडोस्कोपी English

सवाल-जवाब

लिवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत कब पड़ती है?

छोटा जवाब

लिवर ट्रांसप्लांट पर तब विचार किया जाता है जब लिवर फ़ेल हो रहा हो और दूसरे इलाज से व्यक्ति ठीक न रह पाए। आम वजहें हैं परेशानियों वाला एडवांस्ड सिरोसिस, अचानक लिवर फ़ेल्योर, ACLF, और कुछ शुरुआती लिवर कैंसर। भारत में ज़्यादातर ट्रांसप्लांट परिवार के जीवित डोनर के लिवर के हिस्से से होते हैं, और सावधानी से चुने गए मरीज़ों में नतीजे अच्छे हैं।

संकेत कि ट्रांसप्लांट पर बात करने का समय आ गया है

ट्रांसप्लांट पर जल्दी, संकट आने से पहले बात करना सबसे अच्छा है, ताकि जाँच आराम से हो सके।

  • पेट में पानी (जलोदर) जो बार-बार भरे
  • बार-बार भ्रम (हेपेटिक एन्सेफ़ेलोपैथी)
  • वैरिसेज़ से खून बहना
  • लगातार या बढ़ता पीलिया
  • ज़्यादा MELD स्कोर, जिसमें बिलीरुबिन, INR, क्रिएटिनिन और सोडियम शामिल होते हैं
  • ट्रांसप्लांट के लिए सही आकार के अंदर लिवर कैंसर
  • अचानक लिवर फ़ेल्योर, या ठीक न हो रहा ACLF

जाँच

ट्रांसप्लांट टीम दिल, फेफड़े, किडनी, इंफ़ेक्शन, पोषण और मानसिक सेहत देखती है, और यह पक्का करती है कि व्यक्ति शराब से दूर रह सके और ज़िंदगी भर दवाएँ ले सके। परिवार का साथ और सही डोनर भी देखा जाता है।

डोनर

  • जीवित डोनर: परिवार का कोई स्वस्थ सदस्य, आमतौर पर 18 से 55 साल का और मिलते ब्लड ग्रुप वाला, अपने लिवर का हिस्सा देता है। दोनों के लिवर कुछ महीनों में लगभग सामान्य आकार तक बढ़ जाते हैं।
  • मृत डोनर: ब्रेन-डेड डोनर का लिवर, राज्य की अंग-बँटवारा व्यवस्था से, जो वेटिंग लिस्ट की प्राथमिकता पर निर्भर करता है।

ट्रांसप्लांट के बाद जीवन

ज़्यादातर लोग कुछ महीनों में सामान्य कामकाज पर लौट आते हैं। रिजेक्शन रोकने की दवाएँ ज़िंदगी भर ली जाती हैं, नियमित ब्लड टेस्ट के साथ। शराब से दूर रहना, इंफ़ेक्शन से बचना और जाँच के लिए आते रहना ज़रूरी है।

डॉ. क्षितिज लोचब एडवांस्ड लिवर बीमारी वाले मरीज़ों की जाँच करते हैं, परेशानियों का इलाज करते हैं, और सही मरीज़ों को सही समय पर लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर भेजते हैं।

ट्रांसप्लांट से पहले और बाद में खान-पान

ज़्यादा खाएँ

  • ट्रांसप्लांट से पहले: मांसपेशियाँ मज़बूत रखने के लिए हर खाने में प्रोटीन और सोने से पहले हल्का नाश्ता
  • ट्रांसप्लांट के बाद: ताज़ा पका गरम खाना और उबला या फ़िल्टर किया पानी
  • वज़न, शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रण के लिए सब्ज़ियों और साबुत अनाज वाली संतुलित थाली

कम करें

  • ट्रांसप्लांट से पहले पेट में पानी हो तो नमक
  • ट्रांसप्लांट के बाद: कच्चे या अधपके अंडे, मीट और मछली, बिना उबला दूध और सड़क का खाना
  • ग्रेपफ़्रूट और चकोतरा, जो रिजेक्शन रोकने वाली दवाओं में दख़ल देते हैं

जानने लायक

  • रिजेक्शन रोकने वाली दवाएँ इम्युनिटी कम करती हैं, इसलिए खाने की सफ़ाई का ध्यान जीवन भर रखना है।
  • ट्रांसप्लांट के बाद अक्सर वज़न, शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ते हैं; नियमित कसरत मदद करती है।

आम सवाल

क्या जीवित डोनर की सेहत को ख़तरा है?

डोनर की बहुत ध्यान से जाँच होती है, और सिर्फ़ फ़िट लोगों को ही चुना जाता है। ज़्यादातर कुछ महीनों में सामान्य जीवन में लौट आते हैं, और बचा हुआ लिवर लगभग पूरे आकार तक बढ़ जाता है। थोड़ा ख़तरा रहता है, जिसे ट्रांसप्लांट टीम विस्तार से समझाती है।

ट्रांसप्लांट किया लिवर कितने साल चलता है?

कई लोग ट्रांसप्लांट के बाद 20 साल या उससे ज़्यादा अच्छी तरह जीते हैं, अगर वे दवाएँ नियमित लें, शराब से दूर रहें और जाँच कराते रहें।

ट्रांसप्लांट की बात कब शुरू करनी चाहिए?

जल्दी, जब पेट में पानी, भ्रम या ब्लीडिंग जैसी जटिलताएँ शुरू हों, या MELD स्कोर बढ़े। जाँच-प्रक्रिया में समय लगता है और यह संकट से पहले कहीं आसान होती है।

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