सवाल-जवाब
हेपेटिक एन्सेफ़ेलोपैथी (लिवर की बीमारी में बेहोशी या भ्रम) क्या है?
छोटा जवाब
हेपेटिक एन्सेफ़ेलोपैथी लिवर की बीमारी, अक्सर सिरोसिस, से दिमाग के काम में आया बदलाव है। जब लिवर आँत से आने वाले ज़हरीले पदार्थ साफ़ नहीं कर पाता, तो वे दिमाग पर असर करते हैं, जिससे भूलना, नींद, भ्रम और गंभीर मामलों में बेहोशी होती है। यह आमतौर पर किसी वजह से शुरू होता है और इलाज से ठीक होता है।
शुरुआती संकेत जो परिवार देखता है
- दिन में सोना और रात में जागना
- भूलना, धीरे जवाब देना या ध्यान न लगना
- मूड या व्यवहार में बदलाव
- हाथ काँपना या फड़फड़ाना, लिखावट बदलना
- बाद में: भ्रम, ज़्यादा नींद और जगाने में मुश्किल
आम वजहें
- कब्ज़
- इंफ़ेक्शन, जैसे पेशाब, छाती या पेट के पानी में
- पेट या खाने की नली में खून बहना, काले मल के साथ
- पानी की कमी, उल्टी, दस्त या पेशाब की गोलियाँ ज़्यादा
- नींद और बेहोशी की दवाएँ
- शराब
इलाज
प्रोटीन कम नहीं करना चाहिए। सिरोसिस वालों को पर्याप्त प्रोटीन चाहिए, दाल, दही, पनीर, अंडा, मछली या चिकन से, पूरे दिन में बाँटकर, और सोने से पहले थोड़ा नाश्ता।
- वजह ढूँढकर उसका इलाज
- लैक्टुलोज़ सिरप, इतनी मात्रा में कि दिन में दो-तीन बार नरम मल हो
- दोबारा होने से रोकने के लिए कभी-कभी आँत में काम करने वाली एंटीबायोटिक (रिफ़ैक्सिमिन)
- भ्रम या ज़्यादा नींद में अस्पताल में इलाज
कब इमरजेंसी है
अगर व्यक्ति बहुत सुस्त हो, आसानी से न जागे, बहुत भ्रम में हो, या काला मल या उल्टी में खून आए तो तुरंत अस्पताल ले जाएँ या 112 पर कॉल करें। जिन्हें हेपेटिक एन्सेफ़ेलोपैथी हो चुकी है, वे डॉक्टर के कहने तक गाड़ी न चलाएँ।
हेपेटिक एन्सेफ़ैलोपैथी में खान-पान
ज़्यादा खाएँ
- दिन भर में भरपूर प्रोटीन, ख़ासकर दाल, दही, दूध, पनीर, अंडा और मछली से
- हर 2 से 3 घंटे में थोड़ा खाना और सोने से पहले हल्का नाश्ता
- मल नरम रखने के लिए सब्ज़ियों, फलों और साबुत अनाज से फ़ाइबर
कम करें
- लंबे समय तक भूखे रहना या व्रत
- शराब, पूरी तरह
- अगर पेट में पानी भी हो तो नमक
जानने लायक
- प्रोटीन कम करना पुरानी सोच है। इससे मांसपेशियाँ कमज़ोर होती हैं, और कमज़ोर मांसपेशियों से बेहोशी जैसी हालत की संभावना बढ़ती है।
- क़ब्ज़ एक आम वजह है, इसलिए ध्यान रखें कि दिन में दो से तीन बार नरम मल हो।
आम सवाल
क्या हेपेटिक एन्सेफ़ैलोपैथी दोबारा हो सकती है?
हाँ, ख़ासकर अगर क़ब्ज़, इंफ़ेक्शन या ब्लीडिंग जैसी कोई वजह हो। नियमित दवा और वजहों का जल्दी इलाज ज़्यादातर बार इसे दोबारा होने से रोकता है।
क्या भ्रम की हालत हमेशा के लिए रहती है?
आमतौर पर नहीं। वजह का इलाज होने पर यह अक्सर पूरी तरह ठीक हो जाती है। बार-बार होना इस बात का संकेत है कि लिवर ट्रांसप्लांट पर बात करनी चाहिए।
घर पर परिवार किन बातों पर नज़र रखे?
दिन में ज़्यादा नींद, व्यवहार या लिखावट में बदलाव, क़ब्ज़, बुखार और काला मल। ये दिखें तो उसी दिन डॉक्टर से संपर्क करें।