सवाल-जवाब
जलोदर (पेट में पानी भरना) क्या है, और इसका इलाज कैसे होता है?
इसे ऐसे भी खोजा जाता है: pet me pani bharna
छोटा जवाब
जलोदर (एसाइटिस) में पेट के अंदर पानी जमा हो जाता है। सबसे आम वजह लिवर का सिरोसिस है; TB, कैंसर, दिल और किडनी की बीमारी दूसरी वजहें हैं। इलाज में वजह ढूँढना, नमक कम करना, अतिरिक्त पानी निकालने वाली गोलियाँ और ज़रूरत पड़ने पर पानी निकालना शामिल है।
लक्षण
- कुछ हफ़्तों में पेट फूलना, वज़न बढ़ना
- कपड़े टाइट होना, पेट भरा लगना और भूख कम
- पानी ज़्यादा हो तो साँस फूलना
- पैरों में सूजन
जाँच
अल्ट्रासाउंड से पानी की पुष्टि होती है। वजह जानने और इंफ़ेक्शन देखने के लिए आमतौर पर पतली सुई से थोड़ा पानी निकालकर जाँचा जाता है। सिरोसिस वजह हो तो ब्लड टेस्ट, लिवर टेस्ट और कभी-कभी वैरिसेज़ के लिए एंडोस्कोपी होती है।
इलाज
जब तक खून में सोडियम कम न हो, पानी पीना आमतौर पर कम नहीं किया जाता। NSAIDs जैसी दर्द की दवाओं से बचें, जलोदर वालों में ये किडनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- नमक कम करें: ऊपर से नमक न डालें, और अचार, पापड़, नमकीन, पैकेट वाला और बाहर का खाना न खाएँ। ज़्यादातर लोगों को दिन भर में 2 ग्राम से ज़्यादा सोडियम न लेने की सलाह दी जाती है, जो कुल लगभग एक समतल छोटा चम्मच (5 ग्राम) नमक है।
- किडनी से अतिरिक्त नमक और पानी निकालने वाली गोलियाँ (ड्यूरेटिक), साथ में नियमित ब्लड टेस्ट
- सुई से ज़्यादा पानी निकालना (थेराप्यूटिक पैरासेंटेसिस), अक्सर ड्रिप से एल्ब्यूमिन के साथ
- वजह का इलाज, और शराब पूरी तरह बंद
- बार-बार या मुश्किल मामलों में TIPS प्रोसीजर या लिवर ट्रांसप्लांट की जाँच
ख़तरे के संकेत
बुखार, पेट में दर्द, बेहोशी जैसा लगना या पेशाब बहुत कम होना पेट के पानी में इंफ़ेक्शन या किडनी की समस्या हो सकती है। इसमें तुरंत इलाज चाहिए: सबसे पास की इमरजेंसी में जाएँ या 112 पर कॉल करें।
पेट में पानी (एसाइटिस) में खान-पान
ज़्यादा खाएँ
- घर का खाना, जिसमें नमक सिर्फ़ पकाते समय डाला जाए
- हर खाने में प्रोटीन: दाल, दही, पनीर, अंडा, मछली या चिकन
- नमक की जगह नींबू, हरी पत्तियाँ, जीरा, अदरक और लहसुन से स्वाद
कम करें
- अचार, पापड़, नमकीन, चटनी पाउडर और सॉस
- पैकेट वाला, बेकरी और रेस्टोरेंट का खाना, जिसमें छिपा हुआ बहुत नमक होता है
- घोल में खाने का सोडा, और नमक वाला मक्खन या चीज़
जानने लायक
- 'लो सोडियम' नमक डॉक्टर की मंज़ूरी के बिना न लें; इनमें अक्सर पोटैशियम होता है, जो पानी निकालने वाली गोलियों के साथ ख़तरनाक हो सकता है।
- रोज़ एक ही समय पर वज़न लें और डॉक्टर के लिए लिख लें।
आम सवाल
क्या एसाइटिस में पानी कम पीना चाहिए?
आमतौर पर नहीं। पानी तभी कम किया जाता है जब ख़ून में सोडियम कम हो, और तब डॉक्टर बताएँगे कि कितना। पानी से ज़्यादा ज़रूरी नमक कम करना है।
क्या निकालने के बाद पानी फिर भर जाएगा?
अगर वजह अभी भी बनी है तो अक्सर भर जाता है। नमक पर नियंत्रण, पानी निकालने वाली गोलियाँ और वजह का इलाज इसे रोकने में मदद करते हैं। बार-बार पानी निकालना पड़े तो लिवर ट्रांसप्लांट समेत दूसरे विकल्पों पर बात करनी चाहिए।
क्या सुई से पानी निकालना सुरक्षित है?
हाँ। यह अल्ट्रासाउंड की मदद से, जगह सुन्न करके किया जाता है, और ज़्यादा पानी निकालने पर अक्सर ड्रिप से एल्ब्यूमिन दिया जाता है।